सुप्रीम कोर्ट ने विभव कुमार को दी जमानत : 100 दिन की हिरासत के बाद मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने विभव कुमार को दी जमानत : 100 दिन की हिरासत के बाद मिली राहत

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव विभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी है। उन्हें 18 मई 2024 को गिरफ्तार किया गया था, जब आम आदमी पार्टी (आप) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने उन पर सीएम आवास में मारपीट का आरोप लगाया था। 12 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें जमानत दे दी है।

100 दिन की हिरासत और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने विभव कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पिछले 100 दिनों से हिरासत में है और मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला साधारण चोट का है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में विभव की जमानत का विरोध किया। पुलिस का कहना था कि इस मामले में कई अहम गवाहों की पेशी अभी बाकी है और आरोपी द्वारा सबूतों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्तें लगाई जाएंगी, जिससे आरोपी ऐसा न कर सके।

विभव कुमार की गिरफ्तारी और आरोप

विभव कुमार को 18 मई 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आप राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने सीएम आवास में मारपीट का आरोप लगाया था। यह मामला राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना रहा। 12 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने विभव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार, कोर्ट में 51 गवाहों के बयान होने बाकी हैं और मुकदमे में समय लग सकता है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत की शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने विभव कुमार को जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें भी रखी हैं ताकि न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। जमानत की शर्तें इस प्रकार हैं:

– **सीएम के घर और ऑफिस में प्रवेश की मनाही:** आरोपी विभव कुमार को मुख्यमंत्री के आवास और ऑफिस में जाने की अनुमति नहीं होगी।

– **अहम गवाहों के बयान जल्दी दर्ज हों:** कोर्ट ने निर्देश दिया कि तीन महीने के भीतर सभी अहम गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं।

– **केस पर टिप्पणी न करने की शर्त:** आरोपी और उससे जुड़े लोग केस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं करेंगे।

– **पद पर प्रतिबंध:** विभव कुमार को किसी ऐसे पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा जिससे वह केस को प्रभावित कर सकें। उन्हें सीएम का निजी सचिव या ऐसा कोई पद नहीं दिया जाएगा।

– **पार्टी नेताओं की टिप्पणी पर रोक:** आम आदमी पार्टी (आप) के नेता इस केस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

– **कोर्ट का निर्देश:** अगर आरोपी कोर्ट के साथ सहयोग नहीं करता, तो पुलिस इस पर आवेदन दाखिल कर सकती है।

विभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत मिलना उनके लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन उन पर लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं। इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तरों पर ध्यान खींचा है। अब यह देखना होगा कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और विभव कुमार इन शर्तों का पालन कैसे करते हैं।
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