हरियाणा विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के टिकट कटने से जसबीर मलौर की भावुकता, समर्थकों पर छोड़ा चुनाव लड़ने का फैसला

हरियाणा विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के टिकट कटने से जसबीर मलौर की भावुकता, समर्थकों पर छोड़ा चुनाव लड़ने का फैसला

हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में अंदरूनी उथल-पुथल का माहौल है। हाल ही में अंबाला शहर से कांग्रेस द्वारा जसबीर मलौर का टिकट काटने का निर्णय पार्टी के भीतर ही एक नई कहानी को जन्म दे रहा है। इस निर्णय से जसबीर मलौर की भावनाएं आहत हो गई हैं, और उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला अपने समर्थकों पर छोड़ दिया है।

कांग्रेस ने जसबीर मलौर का टिकट काटा

2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जसबीर मलौर को टिकट देकर उन्हें अपनी पार्टी का प्रत्याशी बनाया था। तब निर्मल सिंह बागी हो गए थे और जसबीर मलौर ने चुनाव में अपनी छाप छोड़ी थी। लेकिन इस बार कांग्रेस ने निर्मल सिंह को प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया है। इससे जसबीर मलौर नाखुश हैं और पार्टी से नाराजगी की स्थिति में हैं।

जसबीर मलौर का भावुक बयान

हाल ही में जसबीर मलौर ने अपने समर्थकों की बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के फैसले पर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। इस बैठक के दौरान, जसबीर मलौर 2019 के विधानसभा चुनावों की यादों में खो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे तय करें कि उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं।

समर्थन की अपील और चुनाव लड़ने का निर्णय

जसबीर मलौर ने एक 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो निर्णय लेगी कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरेंगे या नहीं। इस कदम से उनकी नाराजगी और पार्टी के प्रति उनकी भावनाओं का पता चलता है। कांग्रेस के कई नेता, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी शामिल हैं, जसबीर मलौर को मनाने की कोशिशों में लगे हैं। उनका मानना है कि जसबीर मलौर का कांग्रेस के लिए समर्थन महत्वपूर्ण है और उनके बिना चुनावी रणनीति कमजोर हो सकती है।

कांग्रेस और बीजेपी के टिकट कटने का असर

कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों में टिकट वितरण के निर्णय से पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में असंतोष देखने को मिल रहा है। कई नेताओं का कहना है कि टिकट वितरण में पारदर्शिता और न्याय का अभाव है, जिससे पार्टी की छवि और चुनावी स्थिति प्रभावित हो सकती है। जसबीर मलौर का मामला इस बात का प्रतीक है कि कैसे एक पार्टी का आंतरिक निर्णय एक नेता के व्यक्तिगत और राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

 

हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण का मुद्दा केवल पार्टी के भीतर असंतोष को ही उजागर नहीं करता, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे नेताओं की भावनाएं और समर्थन की राजनीति चुनावी मैदान पर प्रभाव डाल सकती है। जसबीर मलौर का मामला इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में व्यक्तिगत भावनाएं और समर्थन भी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अब देखना यह होगा कि जसबीर मलौर अपने समर्थकों के साथ मिलकर किस दिशा में चुनावी जंग लड़ते हैं और कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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