राजस्थान : जहाजपुर प्रशासन की सख्ती, सोमवार को नहीं निकाला जाएगा कोई भी जुलूस
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
राजस्थान के जहाजपुर में प्रशासन ने आगामी सोमवार को बारावफात के मौके पर किसी भी प्रकार के जुलूस की अनुमति न देने का निर्णय लिया है। यह कदम इलाके में हाल ही में फैल रहे सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए उठाया गया है। प्रशासन ने शनिवार को इस आदेश की घोषणा की, ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखी जा सके।
सांप्रदायिक तनाव और पथराव की घटना
शनिवार को जहाजपुर में जलझूलनी एकादशी के अवसर पर पीतांबर राय महाराज के जुलूस पर पथराव की घटना सामने आई। पथराव के बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया और अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में एक महिला समेत कई युवकों के घायल होने की खबर है। पथराव की घटना के बाद, जुलूस में शामिल लोगों ने दूसरे पक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और स्थिति और बिगड़ गई।
राजनीतिक और पुलिस की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के विधायक गोपीचंद मीणा घटनास्थल पर पहुंचे। विधायक ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धार्मिक स्थल के बाहर धरना देने का निर्णय लिया। गोपीचंद मीणा ने कहा कि जब तक आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक वह धरने पर बैठे रहेंगे और कस्बे में भगवान के जल विहार का जुलूस नहीं निकलेगा।
इस घटना के बाद जहाजपुर कस्बे में तनाव फैल गया है और बाजार बंद हो गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस उप अधीक्षक अजीत सिंह मेघवंशी और थाना प्रभारी राम बना सहित पुलिस बल घटना स्थल पर मौजूद हैं।
पुलिस की स्थिति और कार्रवाई
अजमेर रेंज के डी.आई.जी. ओम प्रकाश ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि शाहपुरा से पुलिस अधीक्षक पुलिस बल के साथ जहाजपुर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और आरोपियों का पता लगाने के लिए पुलिस टीमें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
पुलिस की इस कड़ी निगरानी के बावजूद, क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बारावफात के जुलूस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है ताकि कोई भी अप्रिय घटना न घटे।
जहाजपुर में हाल ही की घटनाओं ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि सांप्रदायिक तनाव की स्थिति को नियंत्रित करना कितना महत्वपूर्ण है। प्रशासन द्वारा जुलूस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय और पुलिस की कड़ी निगरानी, दोनों ही इस बात का संकेत हैं कि शांति बनाए रखना और कानून व्यवस्था को सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। जैसे-जैसे चुनावों और धार्मिक अवसरों की तारीखें नजदीक आ रही हैं, इस तरह के तनावपूर्ण घटनाक्रम और प्रशासन की कार्रवाइयाँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती हैं। अब देखना यह होगा कि स्थिति कैसे नियंत्रित होती है और इलाके में शांति कब लौटेगी।
