रणदीप हुड्डा ने बायकॉट कल्चर पर किया खुलासा : सेंसर बोर्ड और बॉलीवुड पर रखे विचार

रणदीप हुड्डा ने बायकॉट कल्चर पर किया खुलासा : सेंसर बोर्ड और बॉलीवुड पर रखे विचार

रणदीप हुड्डा का इंटरव्यू

14 सितंबर को बेंगलुरु में आयोजित इंडिया टुडे माइंड रॉक्स 2024 इवेंट में अभिनेता रणदीप हुड्डा ने अपनी बेबाक राय साझा की। इस इवेंट में मॉडरेटर नबीला जमील के साथ बातचीत करते हुए, रणदीप ने अपने करियर, सेंसर बोर्ड और बायकॉट कल्चर पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने अपनी फिटनेस रूटीन से लेकर बॉलीवुड की बदलावों तक, और सेंसरशिप के मुद्दों पर भी स्पष्ट राय व्यक्त की।

 

बायकॉट कल्चर पर रणदीप हुड्डा की राय

रणदीप हुड्डा ने बायकॉट कल्चर को लेकर अपनी असहमति जताई और कहा कि वह इस सामाजिक मीडिया के चलन को मानते नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “मुझे लगता है कि बायकॉट कल्चर सोशल मीडिया पर नकली है। अगर आप सोशल मीडिया पर देख रहे हैं कि कोई फिल्म को बायकॉट करने की मांग कर रहा है, तो ऐसा नहीं है कि लोग उस फिल्म को नहीं देखेंगे।” हुड्डा का मानना है कि यदि कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही, तो इसका कारण उसके ट्रेलर या कंटेंट की गुणवत्ता हो सकता है, न कि बायकॉट की मांग।

 

सेंसर बोर्ड से जुड़े मुद्दे

रणदीप ने सेंसर बोर्ड के साथ अपने अनुभवों को साझा किया और बताया कि कैसे उनकी फिल्म “सावरकर” को सेंसर बोर्ड से कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “जब मैंने सावरकर पर फिल्म बनाई, तो मैंने उन्हें फिल्म में वीर नहीं बताया। मैंने ऑडियंस पर छोड़ दिया कि वे फिल्म देखने के बाद फैसला करें कि वे वीर थे या नहीं। मुझे सेंसर बोर्ड के सामने सबूत देने को कहा गया, लेकिन मुझे लगता है कि किसी के आर्ट बनाने के नजरिए पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए।”

 

बॉलीवुड में बदलाव

सिनेमा के बदलावों पर बात करते हुए, रणदीप ने बताया कि कैसे उन्होंने चमक-दमक वाली फिल्मों से दूरी बनाई है और ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी है जो मनोरंजक होने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अपने करियर में कई बार उन्होंने इंतजार किया ताकि उन्हें कुछ बेहतर करने को मिले, लेकिन उन्होंने सिनेमा के सार को मनोरंजन और संवेदनशीलता दोनों के रूप में देखा।

 

व्यक्तिगत विचार और करियर की शुरुआत

रणदीप हुड्डा ने अपने करियर की शुरुआत की और बॉलीवुड में अपने संघर्षों और सफलताओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे मॉडलिंग और थिएटर के माध्यम से उनकी फिल्मी यात्रा शुरू हुई। रणदीप ने अपने करियर की शुरुआत के बारे में साझा किया कि किस तरह उन्होंने मीरा नायर की फिल्म “मॉनसून वेडिंग” के लिए ऑडिशन दिया और सफलतापूर्वक भूमिका प्राप्त की।

 

रणदीप हुड्डा का यह इंटरव्यू उनकी स्पष्ट सोच और बेबाक विचारों को दर्शाता है। उन्होंने बायकॉट कल्चर और सेंसरशिप पर अपने अनुभव साझा करते हुए, यह स्पष्ट किया कि वह कला की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं। बॉलीवुड में बदलाव और सिनेमा के भविष्य के बारे में उनके विचार, उद्योग की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं और दर्शकों को नए दृष्टिकोण से सिनेमा देखने की प्रेरणा दे सकते हैं।

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