हरियाणा चुनाव : अनिल विज की राह अंबाला कैंट सीट पर कठिन

हरियाणा चुनाव : अनिल विज की राह अंबाला कैंट सीट पर कठिन

राजनीतिक पृष्ठभूमि

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए चुनौती बढ़ती जा रही है। 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी, तब हरियाणा में भी पार्टी ने सत्ता में वापसी की थी। अब, लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। इस चुनाव में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में एक नाम अनिल विज का है, जो पिछले कई वर्षों से प्रदेश के मुखिया बनने की ख्वाहिश जाहिर करते रहे हैं। लेकिन इस बार अंबाला कैंट सीट पर उनकी जीत उतनी आसान नहीं होगी।

 

अनिल विज का राजनीतिक सफर

अनिल विज, जो 71 साल के हैं, अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र से लगातार चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वह छह बार विधायक रह चुके हैं और दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उनकी इस सीट से जीतने की संभावना पहले की तरह मजबूत नहीं दिखाई दे रही है। उन्हें अब नए चेहरों और मजबूत प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ेगा, जो उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

 

कांटे का मुकाबला

कांग्रेस ने इस बार कुमारी शैलजा के करीबी पूर्व पार्षद परविंदर सिंह परी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विश्वासपात्र निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा, जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं, ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। हाल ही में उन्हें कांग्रेस पार्टी ने निलंबित किया है, लेकिन इससे उनके निर्दलीय चुनावी अभियान पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिखता।

 

आप ने इस बार राज कौर गिल को टिकट देकर महिला वोटरों को साधने का प्रयास किया है। वहीं, इनेलो-बसपा गठबंधन से ओंकार सिंह और जजपा-असपा गठबंधन से करधान भी चुनावी मैदान में हैं। यह सभी प्रतियोगी अनिल विज की जीत को चुनौती देने के लिए तैयार हैं।

 

इनकंबेंसी का असर

अनिल विज को इस बार इनकंबेंसी की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि किसी पार्टी की सरकार लगातार दो या उससे अधिक बार सत्ता में रहने पर मतदाताओं का रुझान उसके प्रति थोड़ा कम हो सकता है। हरियाणा में भाजपा की सरकार पिछले 10 सालों से है, जिससे मतदाताओं में बदलाव की लहर देखने को मिल सकती है।

 

मतदाता समीकरण

अंबाला कैंट में मतदाताओं की संरचना भी अनिल विज की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यहां पंजाबी और जट सिख समुदाय के लगभग 80,000 मतदाता हैं। इसके बाद वैश्य समाज के मतदाताओं की संख्या अधिक है। भाजपा को इन समुदायों के वोटरों पर भरोसा है। इसके साथ ही ओबीसी समुदाय से भी पार्टी को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

अनिल विज के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यदि वह इस बार चुनाव जीतते हैं, तो वह अंबाला कैंट से लगातार चार बार और कुल सात बार विधायक बनने का तमगा हासिल कर सकते हैं।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 सीटों पर मतदान 5 अक्टूबर को होना है, और नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) की एंट्री ने चुनाव को त्रिकोणीय मोड़ दे दिया है। अनिल विज के लिए यह चुनाव उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, लेकिन उनकी राह आसान नहीं है। उन्हें अपने दावों को साबित करने के लिए कठिन परिश्रम करना होगा।

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