भारत अब ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कार निर्माताओं ने एक्सपोर्ट में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है, जो देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह वृद्धि न केवल घरेलू बिक्री में सुधार को दर्शाती है, बल्कि विदेशी बाजारों में भी भारतीय गाड़ियों की मांग को उजागर करती है।
हालिया आंकड़े और प्रवृत्तियाँ
एक्सपोर्ट में वृद्धि
जून 2023 में भारत से पैसेंजर व्हीकल्स का एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 1.96 प्रतिशत बढ़कर 57,618 यूनिट्स तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह संख्या 56,508 यूनिट्स थी। मई 2023 में यह आंकड़ा 53,237 यूनिट्स था। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि भारतीय निर्माताओं द्वारा बनाए गए वाहनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पसंद किया जा रहा है।
एक विशेष कार का जादू
हालांकि, इस दौरान एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिली। मई 2023 में ह्युंडई की नई वरना की केवल एक यूनिट एक्सपोर्ट की गई थी, लेकिन जून में इस मॉडल की बिक्री ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए और 5,634 यूनिट्स तक पहुंच गई। यह एक महीने में हुई चमत्कारिक वृद्धि बताती है कि किस प्रकार एक कार विदेशी बाजारों में लोकप्रियता हासिल कर सकती है।
ह्युंडई वरना का प्रदर्शन
लॉन्च के बाद की प्रतिक्रिया
ह्युंडई वरना की लॉन्चिंग के बाद से ही इसे घरेलू बाजार में जबर्दस्त प्रतिक्रिया मिली थी। मार्च में इसकी बुकिंग शुरू होने के बाद से, इसने भारतीय ग्राहकों का ध्यान खींचा। लेकिन, एक्सपोर्ट में शुरुआत में निराशा हाथ लगी, जिसके कारण केवल एक यूनिट का निर्यात हुआ।
वृद्धि के कारण
हालांकि, जून में वरना की बिक्री में अचानक हुई वृद्धि कई कारकों के कारण हुई। इसकी आधुनिक डिजाइन, तकनीकी विशेषताएँ, और विदेशी ग्राहकों की मांग ने इस कार की लोकप्रियता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सालाना आधार पर इसकी बिक्री में 84.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले साल के 3,048 यूनिट्स से बढ़कर 5,634 यूनिट्स तक पहुंच गई।
अन्य कारों की स्थिति
किआ की कारों का प्रदर्शन
ह्युंडई वरना के अलावा, किआ सोनेट ने भी जून में 5,166 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो सालाना आधार पर 72.37 प्रतिशत अधिक है। यह भी दर्शाता है कि भारतीय निर्माताओं के मॉडल्स को विदेशी बाजारों में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
मारुति सुजुकी की भागीदारी
मारुति सुजुकी की चार गाड़ियों ने भी इस सूची में स्थान पाया। स्विफ्ट ने 3,509 यूनिट्स का निर्यात किया, जबकि बलेनो ने 3,159 यूनिट्स के साथ सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की वृद्धि की। अन्य प्रमुख मॉडलों में किआ सेल्टोस और ह्युंडई ऑरा शामिल हैं, जिनका निर्यात क्रमशः 2,844 और 2,703 यूनिट्स रहा।
भारत का ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और कंपनियों द्वारा किए गए प्रयासों से यह और भी मजबूत हो रहा है। ह्युंडई की वरना की सफलता इस बात का सबूत है कि भारतीय वाहन निर्माताओं की गाड़ियाँ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। यदि यह रुख जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है। 2030 तक भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की संभावनाएँ अत्यधिक सकारात्मक हैं, जो इस उद्योग की वृद्धि को दर्शाती हैं।
