यूपी में मंत्री गिरीश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार को दी धमकी, तीखे सवालों पर भड़के

यूपी में मंत्री गिरीश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार को दी धमकी, तीखे सवालों पर भड़के

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के सदस्यता अभियान के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव की तीखी प्रतिक्रिया ने मीडिया हलकों में हलचल मचा दी है। मंत्री यादव ने पत्रकारों के सवालों पर भड़कते हुए, एक पत्रकार को धमकी भी दी।

मंत्री की प्रतिक्रिया

आजतक के पत्रकार ने नमामि गंगे परियोजना और शीतला चौकिया धाम में किए जा रहे विकास कार्यों पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इन परियोजनाओं के तहत किए जा रहे करोड़ों रुपये के सुंदरीकरण कार्य और उनके परिणामों को लेकर मंत्रालय के विचार क्या हैं।

इस पर गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि गोमती नदी पर रिवर फ्रंट का काम शानदार हो रहा है, लेकिन मीडिया इसे उचित तरीके से कवर नहीं कर रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ये सारे विकास कार्य उनके नेतृत्व में किए जा रहे हैं और मीडिया को इस पर ध्यान देना चाहिए। यादव ने कहा, “हम हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं।”

पत्रकार को धमकी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछने के बाद भाजपा के जिला अध्यक्ष पुष्पराज सिंह ने पत्रकार को निर्देशित किया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सदस्यता अभियान है और अधिक सवाल पूछना उचित नहीं है।

जब प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त हो गई, तो मंत्री गिरीश यादव ने तमतमाए हुए आजतक के पत्रकार राजकुमार सिंह को “देख लेने” की धमकी दी। मंत्री की यह प्रतिक्रिया तीखे सवालों के प्रति उनकी असंतोषजनक प्रतिक्रिया को दर्शाती है।

विकास कार्यों पर बयान

मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि शीतला चौकिया धाम और अन्य परियोजनाओं के लिए अनुमोदित फंड 70 साल के इतिहास में सबसे अधिक है। उन्होंने जिक्र किया कि रिंग रोड का निर्माण, गोमती नदी पर पुलों का निर्माण, महिला ट्रेड के लिए आईटीआई का स्वीकृत होना, फायर स्टेशन का निर्माण और मेडिकल कॉलेज की स्थापना जैसे विकास कार्य भी चल रहे हैं।

मंत्री गिरीश चंद्र यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिक्रिया और पत्रकार को धमकी देने की घटना ने दिखाया कि राजनीति में कठिन सवालों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ रही है। यह घटना मीडिया और राजनीति के बीच की जटिलताओं को उजागर करती है और जनता की जानकारी तक सही और निष्पक्ष पहुंच की आवश्यकता को दर्शाती है।

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