जन्मदिन पर दो नौकरियों का चयन : मुकेश अग्रवाल की दुखद कहानी

जन्मदिन पर दो नौकरियों का चयन : मुकेश अग्रवाल की दुखद कहानी

किस्मत का खेल कब किसे क्या दे, यह कभी-कभी समझना मुश्किल होता है। हरियाणा के नारनौल जिले के मुकेश अग्रवाल के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। उनका जन्मदिन ऐसा अवसर बना, जब उन्होंने दो सरकारी नौकरियों में चयनित होने की खबर सुनी, लेकिन इसके साथ ही एक दिल दहला देने वाली सचाई भी थी—वे इस दुनिया को छोड़ चुके थे। इस कहानी में न केवल मुकेश के परिवार की पीड़ा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह से जीवन और मृत्यु के बीच का यह असंतुलन किस्मत के खेल को दर्शाता है।

मुकेश का जीवन

मुकेश अग्रवाल ने अपने जीवन में कई संघर्ष देखे। वे एक मेहनती छात्र थे, जिन्होंने बीटेक तक की पढ़ाई की। उनका सपना सरकारी नौकरी पाने का था, लेकिन जब उन्होंने फॉर्म भरा, तब उनके परिवार को इसकी जानकारी नहीं थी। मुकेश ने अपने कठिन परिश्रम से रेलवे में लोको पायलट के रूप में चयनित हुए थे, लेकिन उन्हें उस नौकरी को ज्वाइन करने का अवसर नहीं मिला। उनका जीवन एक नई राह पर जा रहा था, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही तय कर रखा था।

अचानक आई दुखद खबर

1 सितम्बर को अचानक मुकेश का दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके परिवार के लिए यह एक बड़ा झटका था। मुकेश के माता-पिता, सीताराम और उनकी पत्नी, इस सदमे से उबर नहीं पा रहे थे। ऐसे में उनके जन्मदिन के दिन जब हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने ग्रुप सी और ग्रुप डी के नतीजे घोषित किए, तो उनके परिवार को एक नई पीड़ा का सामना करना पड़ा।

नौकरी का संदेश

17 अक्टूबर, मुकेश का जन्मदिन, उनकी यादों में एक और कष्टदायक मोड़ लेकर आया। इस दिन जब उनके मोबाइल पर ग्रुप सी और ग्रुप डी में पटवारी पद के लिए चयन का संदेश आया, तो परिवार के सदस्य भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू थे, क्योंकि उन्होंने अपने बेटे को खो दिया था, लेकिन उसकी उपलब्धियों ने उन्हें फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया।

समाज में चर्चा

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने ग्रुप सी के 25,500 और ग्रुप डी के 2,600 पदों के लिए परिणाम जारी किया। इस भर्ती परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर था। विशेष रूप से महेंद्रगढ़ जिले से कई छात्रों का चयन हुआ, जिससे जिले में खुशी का माहौल बना। लेकिन मुकेश के परिवार के लिए यह खुशी की जगह एक दर्दनाक अनुभव था।

किस्मत का खेल

किस्मत के इस खेल ने मुकेश के परिवार को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वास्तव में जीवन और मृत्यु के बीच कुछ भी सुनिश्चित नहीं है। उनकी कहानी यह बताती है कि कैसे सफलता और असफलता का पता नहीं होता और किस तरह से जीवन की अनिश्चितता हमारे सामने आती है।

मुकेश अग्रवाल की कहानी एक ऐसी कहानी है जो हमें यह समझाती है कि जीवन में सब कुछ योजनाबद्ध नहीं होता। किस्मत कभी-कभी हमें ऐसी परिस्थितियों में डाल देती है जहाँ हमें अपने प्रियजनों को खोना पड़ता है, जबकि वे कुछ महत्वपूर्ण हासिल कर रहे होते हैं। यह घटना न केवल मुकेश के परिवार के लिए एक कठिन समय है, बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाती है कि हमें हर पल का मूल्यांकन करना चाहिए और जीवन के हर अवसर को अपनाना चाहिए।

किस्मत के इस खेल में, मुकेश ने जो हासिल किया, वह उनके परिवार के लिए एक प्रेरणा बन गई है, और उनका नाम हमेशा याद किया जाएगा।

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