सिरसा में किसानों का आंदोलन : फसल बीमा क्लेम की मांग को लेकर एलडीएम कार्यालय का घेराव

सिरसा में किसानों का आंदोलन : फसल बीमा क्लेम की मांग को लेकर एलडीएम कार्यालय का घेराव

किसानों की नाराजगी: फसल बीमा की जगह प्रीमियम वापसी

सिरसा में किसानों का आक्रोश एक बार फिर उभरकर सामने आया, जब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उनके खातों से काटे गए प्रीमियम की वापसी की खबर आई। मंगलवार को नाराज किसानों ने एलडीएम (लीड बैंक मैनेजर) कार्यालय का घेराव कर दिया। उन्होंने सरकार और बैंकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और साफ शब्दों में कहा कि वे प्रीमियम की वापसी नहीं, बल्कि फसल बीमा का क्लेम चाहते हैं।

जाट धर्मशाला में किसानों की बैठक

इस विरोध प्रदर्शन से पहले, बीकेई (भारतीय किसान एकता) के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख की अध्यक्षता में जाट धर्मशाला में किसानों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों ने एकमत होकर सरकार और बीमा कंपनियों की नीतियों की आलोचना की। औलख ने बताया कि 31 जुलाई 2023 को, हर साल की तरह, किसानों के खातों से खरीफ फसल का बीमा प्रीमियम काट लिया गया था। लेकिन इस साल गुलाबी सुंडी के प्रकोप से नरमे की फसल बर्बाद हो गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

पोर्टल के खेल से किसानों की नाराजगी

औलख ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियों, बैंकों, और कृषि विभाग ने एक साजिश के तहत किसानों को उनका सही हक देने से रोकने के लिए पोर्टल का खेल खेला। उन्होंने कहा कि जब यह देखा गया कि इस साल भी किसानों को फसल बीमा का क्लेम देना पड़ेगा, तो किसानों को बीमा प्रीमियम ही वापस किया जाने लगा, जोकि उनके लिए अस्वीकार्य है।

93 गांवों में नुकसान, लेकिन क्लेम में धांधली

औलख ने बताया कि जिले के लगभग सभी गांवों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप था, लेकिन विभाग ने केवल 93 गांवों में ही नुकसान दिखाया। उन्होंने कहा कि खराब कटिंग के माध्यम से किए गए इस आकलन में भी कई गांवों में नुकसान की राशि बहुत कम दिखाई गई। उदाहरण के तौर पर, सात गांवों में खराबा 32 से 674 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिखाया गया। इसके अलावा, घुक्कांवाली, राजपुरा, और नहराना जैसे गांवों का बीमा क्लेम अभी तक लंबित है।

किसानों की मांग: बीमा प्रीमियम नहीं, क्लेम चाहिए

किसानों का कहना है कि सरकार और बीमा कंपनियां उन्हें बीमा प्रीमियम वापस करके उनका हक मार रही हैं। लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि खरीफ सीजन 2020 का भी लगभग 65 करोड़ रुपये का मुआवजा सरकार की ओर से जारी कर दिया गया है, लेकिन वह राशि अभी तक ट्रेजरी में पड़ी हुई है और किसानों के खातों में नहीं डाली गई है।

किसानों का गुस्सा जायज है, क्योंकि वे अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। फसल बीमा का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान से बचाना है, लेकिन अगर उन्हें उनका हक नहीं मिलता, तो यह योजना अपने उद्देश्य में विफल हो जाती है। सिरसा के किसानों का यह आंदोलन सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए, ताकि किसानों को उनके नुकसान की भरपाई मिल सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें। सिरसा में किसानों का आंदोलन : फसल बीमा क्लेम की मांग को लेकर एलडीएम कार्यालय का घेराव

किसानों की नाराजगी: फसल बीमा की जगह प्रीमियम वापसी

सिरसा में किसानों का आक्रोश एक बार फिर उभरकर सामने आया, जब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उनके खातों से काटे गए प्रीमियम की वापसी की खबर आई। मंगलवार को नाराज किसानों ने एलडीएम (लीड बैंक मैनेजर) कार्यालय का घेराव कर दिया। उन्होंने सरकार और बैंकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और साफ शब्दों में कहा कि वे प्रीमियम की वापसी नहीं, बल्कि फसल बीमा का क्लेम चाहते हैं।

जाट धर्मशाला में किसानों की बैठक

इस विरोध प्रदर्शन से पहले, बीकेई (भारतीय किसान एकता) के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख की अध्यक्षता में जाट धर्मशाला में किसानों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों ने एकमत होकर सरकार और बीमा कंपनियों की नीतियों की आलोचना की। औलख ने बताया कि 31 जुलाई 2023 को, हर साल की तरह, किसानों के खातों से खरीफ फसल का बीमा प्रीमियम काट लिया गया था। लेकिन इस साल गुलाबी सुंडी के प्रकोप से नरमे की फसल बर्बाद हो गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

पोर्टल के खेल से किसानों की नाराजगी

औलख ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियों, बैंकों, और कृषि विभाग ने एक साजिश के तहत किसानों को उनका सही हक देने से रोकने के लिए पोर्टल का खेल खेला। उन्होंने कहा कि जब यह देखा गया कि इस साल भी किसानों को फसल बीमा का क्लेम देना पड़ेगा, तो किसानों को बीमा प्रीमियम ही वापस किया जाने लगा, जोकि उनके लिए अस्वीकार्य है।

93 गांवों में नुकसान, लेकिन क्लेम में धांधली

औलख ने बताया कि जिले के लगभग सभी गांवों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप था, लेकिन विभाग ने केवल 93 गांवों में ही नुकसान दिखाया। उन्होंने कहा कि खराब कटिंग के माध्यम से किए गए इस आकलन में भी कई गांवों में नुकसान की राशि बहुत कम दिखाई गई। उदाहरण के तौर पर, सात गांवों में खराबा 32 से 674 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिखाया गया। इसके अलावा, घुक्कांवाली, राजपुरा, और नहराना जैसे गांवों का बीमा क्लेम अभी तक लंबित है।

किसानों की मांग: बीमा प्रीमियम नहीं, क्लेम चाहिए

किसानों का कहना है कि सरकार और बीमा कंपनियां उन्हें बीमा प्रीमियम वापस करके उनका हक मार रही हैं। लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि खरीफ सीजन 2020 का भी लगभग 65 करोड़ रुपये का मुआवजा सरकार की ओर से जारी कर दिया गया है, लेकिन वह राशि अभी तक ट्रेजरी में पड़ी हुई है और किसानों के खातों में नहीं डाली गई है।

किसानों का गुस्सा जायज है, क्योंकि वे अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। फसल बीमा का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान से बचाना है, लेकिन अगर उन्हें उनका हक नहीं मिलता, तो यह योजना अपने उद्देश्य में विफल हो जाती है। सिरसा के किसानों का यह आंदोलन सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए, ताकि किसानों को उनके नुकसान की भरपाई मिल सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें।

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