यूपी में गंगा एक्सप्रेस-वे : 56,000 करोड़ रुपये की लागत से विकास का नया आयाम

यूपी में गंगा एक्सप्रेस-वे : 56,000 करोड़ रुपये की लागत से विकास का नया आयाम

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है—गंगा एक्सप्रेस-वे। यह एक्सप्रेस-वे न केवल प्रदेश की जीडीपी में उछाल लाएगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। 594 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट मेरठ से प्रयागराज तक फैला हुआ है और इसकी कुल लागत लगभग 56,000 करोड़ रुपये है।

 

गंगा एक्सप्रेस-वे का महत्व

गंगा एक्सप्रेस-वे को ‘एक्सप्रेस प्रदेश’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य प्रदेश के 12 जिलों और 518 गांवों को जोड़ना है, जिससे लोगों को यात्रा में सहूलियत मिलेगी। यह छह लेन का एक्सप्रेस-वे है, जिसे भविष्य में आठ लेन में भी बदला जा सकेगा। इसकी अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जिससे मेरठ से प्रयागराज की यात्रा मात्र छह घंटों में पूरी हो सकेगी।

 

 

जिलों का विवरण

गंगा एक्सप्रेस-वे उन जिलों से होकर गुजरेगा जो प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये जिले हैं :

– मेरठ
– हापुड़
– बुलंदशहर
– अमरोहा
– संभल
– बदायूं
– शाहजहांपुर
– हरदोई
– उन्नाव
– रायबरेली
– प्रतापगढ़
– प्रयागराज

 

विस्तार की योजना

गंगा एक्सप्रेस-वे का एक और महत्वाकांक्षी चरण प्रस्तावित है, जिसमें इसे 350 किलोमीटर और बढ़ाकर मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, गाजीपुर और बलिया तक ले जाने की योजना है। इस विस्तार के बाद यह बिहार की सीमा से भी जुड़ेगा, जिससे बिहार के निवासियों को दिल्ली तक आसान पहुंच मिलेगी। इसके पूरा होने पर, गंगा एक्सप्रेस-वे देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बन जाएगा, जिसकी कुल लंबाई 950 किलोमीटर होगी।

 

निर्माण की समय सीमा

योगी सरकार ने 2024 में होने वाले कुंभ मेले से पहले इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, हाल की बारिश के कारण निर्माण कार्य में कुछ देरी होने की संभावना जताई जा रही है। निर्माण की कुल लागत 37,350 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें भूमि अधिग्रहण की लागत भी शामिल है। राज्य सरकार और यूपी एक्सप्रेस-वे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के अधिकारी इस परियोजना को तेजी से पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

 

प्रदेश के विकास में योगदान

गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण प्रदेश के विकास और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करेगा। इस परियोजना से न केवल उत्तर प्रदेश की जीडीपी में बढ़ोतरी होगी, बल्कि यह राज्य के दूरदराज के इलाकों को भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से जोड़ेगा। इससे व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

 

गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल विकास की गति को तेज करेगा, बल्कि लोगों की जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा। इसके जरिए प्रदेश में आर्थिक विकास के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे आम जनता को भी लाभ होगा। यदि सरकार इस परियोजना को समय पर पूरा कर पाती है, तो यह एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है कि कैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास संभव है।

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