हरियाणा विधानसभा चुनाव : कांग्रेस और AAP के बीच गठबंधन नहीं हो पाया, जानिए वजहें

हरियाणा विधानसभा चुनाव : कांग्रेस और AAP के बीच गठबंधन नहीं हो पाया, जानिए वजहें

गठबंधन की बातचीत में अड़चनें

हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच गठबंधन की संभावनाओं को लेकर कई महीनों से चर्चा हो रही थी। दोनों दलों ने गठबंधन के लिए बातचीत की, लेकिन अंततः यह डील फाइनल नहीं हो सकी। सोमवार को, आम आदमी पार्टी ने हरियाणा की 20 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी, जिससे स्पष्ट हो गया कि गठबंधन की संभावना अब खत्म हो गई है।

 

कांग्रेस के प्रभावशाली नेता और सीटों पर मतभेद

खबरों के अनुसार, कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता ने गठबंधन की संभावनाओं पर पानी फेर दिया। इस नेता ने AAP के साथ गठबंधन के विरोध में ठोस रुख अपनाया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों दलों के बीच समझौता नहीं हो पाया। राहुल गांधी, जो इस गठबंधन को लेकर सकारात्मक थे, ने एकता का संदेश देने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी के साथ गठबंधन की सिफारिश की थी। हालांकि, कांग्रेस के भीतर के मतभेद इस गठबंधन को लागू होने से रोकने में सफल रहे।

 

सीटों को लेकर कांग्रेस और AAP के बीच असहमति

गठबंधन को लेकर सबसे बड़ी समस्या सीटों के आवंटन पर रही। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से 10 से 15 सीटों की मांग की थी। बाद में, AAP ने कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें पसंदीदा सीटें देती है, तो वे 5 से 7 सीटों पर ही मान जाने के लिए तैयार हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी, जो पहले से ही कुछ सीटों पर मजबूत स्थिति में थी, जैसे कि कलायत, पेहोवा, जींद, गुहला और सोहना, इन सीटों को AAP को देने के लिए तैयार नहीं थी। कांग्रेस की ओर से AAP को कमजोर सीटें देने की कोशिश की गई, जिसे AAP ने स्वीकार नहीं किया।

 

राघव चड्ढा की भूमिका और विफलता की वजहें

आम आदमी पार्टी की ओर से वार्ता कर रहे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कांग्रेस को अलग-अलग सीटें देने की पेशकश की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई। बातचीत में असहमति और सटीक सीट आवंटन पर झगड़ा मुख्य कारण बन गया, जिससे गठबंधन की उम्मीदें समाप्त हो गईं।

 

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और AAP के बीच गठबंधन की असफलता ने राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। दोनों दलों के बीच मतभेद, विशेष रूप से सीट आवंटन को लेकर, ने इस गठबंधन को अंजाम तक पहुंचाने से रोक दिया। अब, हर पार्टी को अपने-अपने चुनावी अभियान में जुटना होगा और देखना होगा कि यह विभाजन चुनावी परिणामों पर क्या असर डालता है।

 

 

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