हरियाणा विधानसभा चुनाव : कांग्रेस को कुमारी सैलजा की चुप्पी से हो सकता है बड़ा नुकसान

हरियाणा विधानसभा चुनाव : कांग्रेस को कुमारी सैलजा की चुप्पी से हो सकता है बड़ा नुकसान

कुमारी सैलजा की चुनावी प्रचार से दूरी

हरियाणा विधानसभा चुनावों का माहौल गरमाया हुआ है, लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी के लिए एक नई समस्या खड़ी हो गई है। सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा, जो कांग्रेस की स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं, ने चुनावी प्रचार से दूरी बना ली है। उनकी इस चुप्पी ने पार्टी के अंदर चिंता की लहर दौड़ा दी है। कुमारी सैलजा ने न केवल प्रचार से दूरी बनाई है, बल्कि विधानसभा चुनाव को लेकर भी कोई बयान नहीं दिया है। इससे कांग्रेस पार्टी की चिंताएँ और भी बढ़ गई हैं।

 

टिकट बंटवारे का असर

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कुमारी सैलजा टिकट बंटवारे में अपेक्षित तवज्जो न मिलने और हुड्डा समर्थकों की टिप्पणियों से आहत हैं। इन कारणों ने उन्हें चुनावी गतिविधियों से दूर कर दिया है। कांग्रेस पार्टी में उनके इस मौन का गंभीर असर देखने को मिल सकता है, खासकर तब जब हरियाणा में 17 आरक्षित सीटें हैं। सैलजा का असर हिसार, सिरसा और अंबाला संसदीय क्षेत्रों में लगभग 21 विधानसभा सीटों पर है, और उनकी अनुपस्थिति कांग्रेस के लिए एक बड़ा नुकसान बन सकती है।

 

हुड्डा खेमे में खलबली

कुमारी सैलजा की चुप्पी ने न केवल कांग्रेस पार्टी को चिंतित किया है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खेमे में भी खलबली मचा दी है। हुड्डा ने सैलजा की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह टिप्पणियाँ मैनिपुलेटेड हैं और कुमारी सैलजा कांग्रेस की सम्मानित नेता हैं। हालांकि, उनकी इस प्रतिक्रिया के बावजूद सैलजा का मौन पार्टी के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है।

 

कांग्रेस का दलित चेहरा

कुमारी सैलजा हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का एक महत्वपूर्ण दलित चेहरा मानी जाती हैं। उनके समर्थन से पार्टी को दलित मतदाताओं का भरोसा हासिल हुआ है। यदि सैलजा चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखती हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। हरियाणा की राजनीति में दलित वोटरों की संख्या महत्वपूर्ण है, और इस वर्ग का समर्थन खोना कांग्रेस के लिए चुनावी नुकसान का कारण बन सकता है।

 

चुनावी माहौल में बदलाव

हरियाणा में चुनावी माहौल तेजी से बदल रहा है। ऐसे में कुमारी सैलजा का मौन कई सवाल खड़े करता है। यदि वह जल्द ही अपने चुनावी कार्यक्रम को नहीं शुरू करतीं, तो यह कांग्रेस के लिए बड़ी चिंता का विषय बन सकता है। कांग्रेस हाईकमान को इस स्थिति को गंभीरता से लेना होगा और सैलजा की समस्याओं का समाधान ढूंढना होगा।

 

हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के सामने कई चुनौतियाँ हैं। कुमारी सैलजा का चुनाव प्रचार से दूरी बनाना पार्टी के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। उनके बिना, पार्टी को न केवल एक महत्वपूर्ण नेता का नुकसान होगा, बल्कि इससे दलित वोटरों का समर्थन भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए, कांग्रेस को जल्द ही इस स्थिति को संभालने के लिए कदम उठाने होंगे, अन्यथा चुनावी परिणाम पार्टी के पक्ष में नहीं आ सकते।

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