सोशल मीडिया का युवाओं पर असर, मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक घंटे का ब्रेक जरूरी

 

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया का इस्तेमाल हर उम्र के लोगों द्वारा किया जा रहा है, खासकर युवा वर्ग के बीच। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपनी राय व्यक्त करते हैं, जानकारी साझा करते हैं और दूसरे लोगों से जुड़ते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ इसके साइड इफेक्ट्स भी सामने आ रहे हैं, जिनकी अनदेखी करना किसी के लिए भी सही नहीं है। खासकर युवा वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया का प्रभाव गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव

सोशल मीडिया ने हमारी जिंदगी को जितना आसान और जुड़ा हुआ बनाया है, उतना ही इसके नकारात्मक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। बहुत से लोग यह नहीं समझ पाते कि लगातार सोशल मीडिया पर वक्त बिताना उनके मानसिक स्वास्थ्य को किस हद तक प्रभावित कर सकता है। खासकर युवाओं के लिए यह एक बड़ा खतरा बन गया है, क्योंकि यह आयु वर्ग भावनात्मक रूप से भी अधिक संवेदनशील होता है।

एक नई रिसर्च के अनुसार, सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण युवाओं में अवसाद, चिंता और आत्मसंतुष्टि की कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। पॉपुलर मीडिया जर्नल Psycnet में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है, खासकर उन युवाओं के लिए जो भावनात्मक रूप से कमजोर हैं।

एक घंटे का सोशल मीडिया ब्रेक कर सकता है मानसिक स्वास्थ्य में सुधार

इस अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल में कमी लाकर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने 220 स्नातक छात्रों पर अध्ययन किया, जो नियमित रूप से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे। अध्ययन में पाया गया कि अगर सोशल मीडिया का उपयोग प्रति दिन एक घंटे से कम किया जाए तो इससे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।

अध्यान में तीन सप्ताह तक किए गए प्रयोग में जिन प्रतिभागियों ने सोशल मीडिया का उपयोग सीमित किया, उनके अवसाद और चिंता के लक्षण कम हो गए। इसके अलावा, उन्हें खो जाने का डर भी कम महसूस हुआ और उनकी नींद में लगभग 30 मिनट का इजाफा हुआ। इस अध्ययन से यह साफ हो गया कि थोड़ी सी समय सीमा में बदलाव से भी मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

सोशल मीडिया से जुड़ी मानसिक समस्याओं के आंकड़े

आज के समय में किशोरावस्था और युवा वयस्कता के दौरान मानसिक विकारों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। एक आंकड़े के अनुसार, हर साल लगभग 20% युवाओं में मानसिक विकार जैसे अवसाद और चिंता के मामले सामने आते हैं। इन मानसिक विकारों के कारण युवा वर्ग में आत्महत्या के मामलों की संख्या भी बढ़ रही है।

सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताना युवाओं में असुरक्षा और आत्मसंतुष्टि की कमी को बढ़ावा देता है। दूसरों की तुलना में खुद को कमतर महसूस करना, दूसरों की लाइफस्टाइल और उपलब्धियों को देखकर खुद को कमतर समझना, यह सब मानसिक तनाव को जन्म देता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना जरूरी हो जाता है।

रात की नींद पर भी है असर

अध्यान के नतीजे यह भी बताते हैं कि सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने से रात की नींद भी प्रभावित होती है। सोशल मीडिया पर लगातार वक्त बिताने से कई बार नींद की कमी और मानसिक थकावट का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब सोशल मीडिया का उपयोग सीमित किया गया, तो छात्रों ने लगभग 30 मिनट अधिक नींद लेना शुरू किया, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य

सोशल मीडिया ने जीवन को आसान और मनोरंजन से भरपूर बना दिया है, लेकिन इसकी अत्यधिक लत मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। इस शोध के आधार पर यह साफ हो गया है कि युवा वर्ग के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल में नियंत्रण बेहद जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक घंटे का सोशल मीडिया ब्रेक बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

इसलिए, अगर आप चाहते हैं कि आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहे और आप जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें, तो सोशल मीडिया के इस्तेमाल को सीमित करना जरूरी है। छोटी-सी जागरूकता और सही कदम आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

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