भारत में परिवहन निगम की बसों को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में कंवर्ट करने की योजना बनाई जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का उद्देश्य है कि मानकों के अनुरूप फिट सरकारी बसों में ईवी किट लगाने का विकल्प दिया जाए, ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके। इस खबर के साथ ही यह सवाल उठता है कि क्या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण का स्तर वास्तव में कम होगा? आइए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
ईवी और प्रदूषण का गणित
इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रभाव को समझने के लिए दो पहलुओं पर गौर करना जरूरी है: पहला, प्रत्यक्ष प्रदूषण जैसे कि टेलपाइप से निकलने वाला धुआं और दूसरा, बिजली उत्पादन की प्रक्रिया से होने वाला अप्रत्यक्ष प्रदूषण।
1. प्रत्यक्ष प्रदूषण
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में टेलपाइप से प्रदूषण का कोई उत्सर्जन नहीं होता। इसका मतलब है कि ये वाहन जीरो पॉल्यूशन में काम करते हैं। पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले, ईवी से कोई धुआं नहीं निकलता, जो सीधे तौर पर वायु प्रदूषण को कम करता है।
2. अप्रत्यक्ष प्रदूषण
हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बिजली का उत्पादन मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधनों जैसे कोयले से होता है। इस प्रक्रिया में कार्बन का उत्सर्जन होता है, जो ग्रीनहाउस गैसों को बढ़ाता है और वैश्विक तापमान को प्रभावित करता है। यदि हम नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर या पवन ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करें, तो हम बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण को भी कम कर सकते हैं।
ईवी के निर्माण में प्रदूषण
ईवी की बैटरी के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रदूषण में योगदान करती है। रिसर्च के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों से 100% पॉल्यूशन को खत्म नहीं किया जा सकता है। ये वाहन पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कम मात्रा में सही, लेकिन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं।
आम लोगों को ईवी से होने वाले फायदे
सरकारी या निजी वाहन, अगर ईवी में कंवर्ट होते हैं, तो आम इंसान को कई फायदे होते हैं:
1. सस्ती यात्रा
इलेक्ट्रिक वाहनों में जीवाश्म ईंधन के बजाय बिजली का इस्तेमाल होने से यात्रा के खर्च में कमी आती है।
2. मेंटेनेंस कॉस्ट में कमी
ईवी की बैटरी, मोटर और इलेक्ट्रॉनिक्स की नियमित देखभाल की लागत पेट्रोल-डीजल वाहनों के मुकाबले कम होती है।
3. टैक्स में राहत
सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन फीस में छूट देती है और रोड टैक्स में भी कमी करती है।
4. बेहतर एयर क्वालिटी
ईवी कार्बन का उत्सर्जन बेहद कम करते हैं, जिससे नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन में कमी आती है। इसका सीधा असर वायु गुणवत्ता पर होता है।
5. ध्वनि प्रदूषण में कमी
इलेक्ट्रिक वाहन सड़क पर दौड़ते समय कम शोर करते हैं, जिससे ध्वनि प्रदूषण में कमी आती है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
नॉर्वे में इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा है, जहां 80% वाहन इलेक्ट्रिक हैं। वहीं, चीन में ईवी का सबसे बड़ा मार्केट है, लेकिन यहां केवल 22% वाहन ही इलेक्ट्रिक हैं। आइसलैंड में 41%, स्वीडन में 32% और नीदरलैंड्स में 25% इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जा रहा है।
सरकारी बसों को इलेक्ट्रिक वाहनों में कंवर्ट करना एक सकारात्मक कदम है, जो प्रदूषण को कम करने में सहायक होगा। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और बैटरी निर्माण से भी प्रदूषण होता है। इसलिए, यदि हम नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाते हैं, तो हम ना केवल अपने परिवहन के तरीके को बदलेंगे, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा योगदान देंगे।
