गोपाल कांडा की बढ़ती ताकत से BJP को क्या है डर ? जानिए पूरा चुनावी समीकरण
हरियाणा विधानसभा चुनाव के संदर्भ में हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 16 सितंबर को सिरसा सीट से अपने प्रत्याशी रोहताश जांगड़ा का नामांकन वापस ले लिया है, जिसके बाद सिरसा सीट पर BJP का कोई उम्मीदवार नहीं बचा है। इस बदलाव के पीछे गोपाल कांडा की बढ़ती राजनीतिक ताकत और स्थानीय समीकरणों की अहम भूमिका मानी जा रही है।
सिरसा से BJP का प्रत्याशी वापस लेना: राजनीतिक गणना
हरियाणा में सिरसा सीट पर चुनावी माहौल बेहद गर्म है। BJP ने पहले सिरसा से रोहताश जांगड़ा को अपना प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन अचानक नामांकन वापस लेने के निर्णय ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। यह निर्णय उस समय आया है जब BJP की ओर से गोपाल कांडा के साथ गठबंधन की चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि, अब तक गोपाल कांडा ने BJP के समर्थन को लेकर कोई सकारात्मक बयान नहीं दिया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
गोपाल कांडा का प्रभाव: BJP की रणनीति पर असर
गोपाल कांडा हरियाणा की राजनीति में एक प्रमुख नाम बन चुके हैं। सिरसा विधानसभा सीट पर लगातार जीत दर्ज करने वाले कांडा ने 2014 और 2019 के चुनावों में अपनी पार्टी हरियाणा लोकहित पार्टी (हलोपा) के तहत सफलता हासिल की थी। 2019 में कांडा ने 44 हजार से अधिक वोट प्राप्त किए और आजाद प्रत्याशी गोकुल सेतिया को मात्र 600 वोटों के अंतर से हराया था। कांडा की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ और राजनीतिक अनुभव ने BJP को चिंता में डाल दिया है।
BJP को यह डर था कि अगर वह अपने प्रत्याशी को मैदान में रखती, तो वोट बंटने का खतरा हो सकता था, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार गोकुल सेतिया को फायदा मिल सकता था। इस संभावित वोट बंटवारे के खतरे को देखते हुए BJP ने आखिरी समय में अपने प्रत्याशी का नामांकन वापस ले लिया। हालांकि, गोपाल कांडा ने अभी तक BJP के समर्थन में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, जिससे स्थिति और पेचीदा हो गई है।
गोकुल सेतिया की बढ़ती लोकप्रियता: एक नया खतरा
गोकुल सेतिया इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके परिवार का राजनीतिक इतिहास भी प्रभावशाली है, उनके नाना लक्ष्मण दास अरोड़ा पांच बार विधायक और चार बार मंत्री रहे थे। गोकुल सेतिया का परिवार लंबे समय से सिरसा की राजनीति में सक्रिय रहा है, जिससे उनकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ है। यह भी एक कारण है कि BJP को कांडा और सेतिया के बीच वोटों के विभाजन का डर था, जिससे कांग्रेस को लाभ मिल सकता था।
गोपाल कांडा का बयान: राजनीति की नई दिशा
गोपाल कांडा ने BJP के प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी ओर से कोई बातचीत या समर्थन का प्रस्ताव BJP को नहीं दिया गया है। कांडा ने स्पष्ट किया कि उनका गठबंधन इनेलो और बसपा के साथ अटूट है और इस गठबंधन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। कांडा ने यह भी कहा कि उनका गठबंधन किसानों के हित में है और जनता उनके कामों की सराहना कर रही है।
कांडा ने कांग्रेस पर भी हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस की सोच दलित विरोधी है और उनके नेता राहुल गांधी ने आरक्षण के खिलाफ विदेशों में बयान दिया है। कांडा का यह बयान कांग्रेस के खिलाफ उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जो आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
सिरसा विधानसभा सीट पर चल रही राजनीतिक उठापटक और गोपाल कांडा की बढ़ती ताकत ने हरियाणा के चुनावी समीकरण को एक नया मोड़ दे दिया है। BJP की रणनीति और कांडा की राजनीति के बीच का यह संघर्ष आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इस घटनाक्रम ने न केवल सिरसा बल्कि पूरे हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है।
